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किसानों को रेज्ड बेड पद्धति से बुवाई करने को प्रोत्साहित किया जाये – कृषि उत्पादन आयुक्त
May 28, 2020 • EDITOR • उज्जैन शहर

1962 पशुधन संजीवनी योजना अन्तर्गत पशुपालकों को घर पहुंच सुविधा दी जायेगी, कृषि उत्पादन आयुक्त ने उज्जैन संभाग की,रबी फसलों की समीक्षा एवं खरीफ फसलों की तैयारी की समीक्षा की
उज्जैन। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री केके सिंह ने गुरूवार को उज्जैन संभाग की रबी 2019-20 फसलों की समीक्षा एवं खरीफ 2020 की फसलों की तैयारियों की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। उन्होंने उज्जैन संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि रेज्ड बेड पद्धति एक अच्छी बुवाई की पद्धति है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए किसानों को प्रोत्साहित किया जाये कि वे मक्का, सोयाबीन और अन्य फसलों की बुवाई इसी पद्धति से करें। इस पद्धति की विशेषता यह है कि अतिवृष्टि एवं अल्पवर्षा की स्थिति में भी फसलों की बुवाई को नुकसान नहीं होता है। उन्होंने 1962 पशुधन संजीवनी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि पशु पालकों को घर पहुंच पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उज्जैन संभाग के नीमच, रतलाम एवं शाजापुर में योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किये जाने के कारण पशुपालकों को काफी लाभ मिला है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पशुपालन एवं डेयरी उद्योग, कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी एवं मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने निर्देश दिये कि दुग्ध संघ की प्राथमिक दुग्ध समिति के सदस्यों को क्रेडिट कार्ड योजना से जोड़कर पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाये। साथ ही दुग्ध सहकारी समितियों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर मजबूती प्रदान करने के प्रयास किये जायें। उन्होंने बताया कि नेशनल एनीमल डिसिज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत समस्त गोवंश में शत-प्रतिशत टीकाकरण का कार्य किया जाना है। टीकाकरण का कार्य वर्ष में दो बार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि एक हजार गौशालाओं के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। गौशाला संचालन के लिये ग्राम पंचायत एवं स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जाये। पशुपालन से नये लोगों को जोड़कर रोजगार के अवसर मुहैया कराये जायें। उन्होंने उज्जैन संभाग की रबी 2019-20 एवं खरीफ 2020 की तैयारियों के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कमिश्नर उज्जैन संभाग को निर्देश दिये कि उज्जैन संभाग में यूरिया में विशेष रूप से फोकस करने की आवश्यकता है। 2600 मैट्रिक टन की रैक लगी है। इसका शत-प्रतिशत उठाव किया जाये।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने मत्स्य की गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा तालाब का निर्माण कर मछली पालन को प्रोत्साहित किया जाये। जिन किसानों के बैंक खाते जिस बैंक में हैं, उसी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड उनका बनाया जाये। कमिश्नर श्री आनन्द कुमार शर्मा ने बताया कि नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं को चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। क्रेडिट कार्ड भी प्रदान किये जायेंगे। ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि मन्दिरों में सांची का घी एवं प्रसाद का वितरण शुरू कराया जाये। उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादन एवं सप्लाई में वर्तमान समय में अन्तर आ जाने के कारण जिले में पावडर प्लांट की सख्त आवश्यकता है।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने मनरेगा के अन्तर्गत किसानों के निजी पट्टे की भूमि पर वर्ष 2020-21 में फलोद्यान रोपणी को प्रोत्साहित करने के लिये कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये और कहा कि सभी कलेक्टर्स विशेष रूप से फलोद्यान, सब्जी, मसालों, पुष्प की खेती को बढ़ावा देने के लिये 10-10 क्लस्टर तैयार करायें। साथ ही औषधीय फसलों के 20-20 क्लस्टर तैयार करायें। प्रमुख सचिव सहकारिता श्री उमाकान्त उमराव ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिये कि वे सहकारी बैंकों में हुए गबन के मामलों में प्राथमिकता दर्ज करते हुए जांच की कार्यवाही तेज करें तथा शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करें। जिला स्तर पर गबन, धोखाधड़ी के प्रकरणों के सम्बन्ध में होने वाली बैठकें नियमित रूप से हों।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग के दौरान कमिश्नर श्री आनन्द कुमार शर्मा, कलेक्टर श्री आशीष सिंह एवं सभी सम्बन्धित अधिकारीगण मौजूद थे।